corona cases in india: दुनिया के दूसरे कोरोना केंद्रों की तुलना में कहां खड़ा है भारत – how india compares to other coronavirus hotbeds like us, spain, italy, iran and china

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Naveen Kumar Pandey | इकनॉमिकटाइम्स.कॉम | Updated:

सांकेतिक तस्वीर।सांकेतिक तस्वीर।
हाइलाइट्स

  • WHO ने कहा कि भारत में कोरोना महामारी से निपटने की अद्भुत क्षमता है
  • भारत ने दूसरे देशों की तुलना में यात्रा पाबंदियां बहुत पहले लागू कर दी थीं
  • घनी आबादी, सरकारी अस्पतालों की कमी, कई बीमारियों का पहले से प्रकोप देश के लिए बड़ी चुनौती हैं

नई दिल्ली

देश में कोरोना वायरस से बढ़ते प्रकोप के कारण घोषित लॉकडाउन का तीसरा दिन है। 1 अरब 30 करोड़ की आबादी वाले देश में संपूर्ण लॉकडाउन पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा कि कोविड-19 के खिलाफ भारत की जंग वैश्वक पैमाने पर छिड़े युद्ध का नतीजा तय कर सकता है। इस वैश्विक संस्था ने कहा कि भारत में इस महामारी से निपटने की अद्भुत क्षमता है क्योंकि उसके पास स्मॉलपॉक्स और पोलियो को मिटाने का अनुभव है।

WHO ने ये बातें यूं ही नहीं कही हैं। कोविड-19 के खिलाफा भारत की लड़ाई कई मायनों में अद्भुत रही है। भारत ने चीन समेत कई देशों से पहले कोरोना वायरस को लेकर चौकन्ना हो गया। चीन ने तो शुरू-शुरू में कोरोना वायरस के संक्रमण की खबरों को दबाने की कोशिश की और बाद में वह इसे दूसरे देशों में जाने से भी नहीं रोक सका। लेकिन, भारत के सामने वायरस के संक्रमण के तीसरे चरण में पहुंचने से रोकने की असली चुनौती अब शुरू हुई है।

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भारत के लिए अच्छी और बुरी खबरें

भारत ने दूसरे देशों की तुलना में यात्रा पाबंदियां बहुत पहले लागू कर दी थीं। कई राज्यों ने सार्वजनिक स्थलों को भी फटाफट बंद कर दिया। बावजूद इसके कुछ तथ्य ऐसे हैं जो चिंता का कारण बन सकते हैं। मसलन, देश की घनी आबादी, बुनियादी सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, कई बीमारियों का प्रकोप और संयुक्त परिवार में युवा से बुजुर्ग तक कोरोना के संक्रमण का खतरा आदि। ध्यान रहे कि पिछले कुछ दिनों से देश में कोविड-19 मरीजों की संख्या में पहले की तुलना में तेज वृद्धि हो रही है।



कोरोना और भारत बनाम विश्व


दुनियाभर में कोरोना वायरस के संक्रमण की रफ्तार के आंकड़ों पर गौर करें तो पहले दो चरण बहुत महत्वपूर्ण हैं- पहले 100 मामले और 100 के बाद एक-एक केस। भारत में कोविड-19 मरीज की संख्या 100 तक पहुंचने में तीन महीने लगे, लेकिन पिछले 12 दिनों में यह आंकड़ा करीब सात गुना हो चुका है।



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पूर्वी एशिया


वहीं, जापान में कोविड-19 के मरीजों की संख्या 100 तक पहुंचने से पहले हर दिन मरीजों की तादाद में 13% की वृद्धि हुई थी। लेकिन, 100 के बाद मरीजों की तादाद में प्रति दिन वृद्धि की दर घटकर 8.1% पर आ गई है। सिंगापुर और कोरिया में भी जापान जैसी स्थिति ही है।

भारत समेत कम-से-कम 23 ऐसे देश हैं जो उल्टी दिशा में जा रहे हैं। इन देशों में मरीजों की संख्या 100 तक पहुंचने की रफ्तार तो बहुत कम रही, लेकिन उसके बाद रफ्तार में तेजी आ गई। इन देशों में मरीजों का ग्राफ ऊपर जा रहा है। कहा जा सकता है कि यहां कोरोना के खिलाफ उठाए गए कदम या तो असफल या सीमित प्रभाव वाले साबित हो रहे हैं।

पूर्वी एशिया के देशों में शुरू-शुरू में कोविड-19 के मरीजों की तादाद बाकी दुनिया के मुकाबले सबसे ज्यादा थी, लेकिन अब वहां इसमें गिरावट आ रही है। चीन, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया और जापान में मरीजों की तादाद 100 तक पहुंचने से पहले की रफ्तार बाद में घटती गई। इन देशों में पश्चिमी यूरोप के देशों, अमेरिका और भारत के मुकाबले मरीजों की संख्या में वृद्धि की रफ्तार थामने में कामयाब रहे हैं।

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अमेरिका में सबसे ज्यादा मरीज

अमेरिका, स्पेन और फ्रांस के मुकाबले इटली में अब नए मामलों की संख्या में गिरावट देखी जा रही है। यही कारण है कि अमेरिका ने कोरोना पीड़ितों की संख्या के मामले में चीन, इटली समेत सभी देशों को पीछे छोड़ दिया है। गुरुवार तक वहां कोविड-19 मरीजों की संख्या 85 हजार के पार कर गई थी। इटली में भी मरीजों की संख्या 80 हजार के पार है।

शुरुआती तबाही के बाद संभला ईरान

कोरोना प्रभावित 19 देशों में हर दिन नए मामलों की वृद्धि दर में 10 पर्सेंटेज पॉइंट की गिरावट आई है। डेनमार्क और आयरलैंड जैसे औसतन उच्च प्रति व्यक्ति आय वाले कुछ देश ही मरीजों की संख्या 100 तक पहुंचते-पहुंचते लगभग नियंत्रण पा लिया। इनमें आठ देशों में प्रति दिन नए मामलों की वृद्धि दर में 30 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है। चीन से बाहर कोरोना ने सबसे पहले जिस देश में सबसे ज्यादा तबाही मचाई, वह है ईरान। लेकिन, वहां पहले 100 मरीजों के बाद नए मामलों के रोजाना औसत में 60 पर्सेंटेज पॉइंट की कमी आ गई है।



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